Wednesday, 28 October 2015

मैं तो पिया सी हो गयी....!!!

करके मैं साजों श्रृंगार...
माथे पर उनके नाम का सिंदुर,
गले में उनकी बाहों का हार...
मैं आईना बना कर,
उनकी आखों में खो गयी..
रे सखी...
मैं तो पिया सी हो गयी....
हाथों में रचा कर,
उनके नाम की महंदी,
होटों पर सजा कर,
उनके नाम की लाली...
मैं तो सावरें की छवि में खो गयी,
रे सखी...
मैं तो पिया सी हो गयी....
पहन कर पैरो में पयाल..
की छम-छम ,
पहन तुम्हारे नाम के कंगन,
मैं रंग बिरँगी चूड़ियों में खो गयी...
रे सखी....
मैं तो पिया सी हो गयी....
कर सारे सोलह श्रृंगार,
कि अब दिख जाये चाँद,
लो मैं उनके लिए तैयार हो गयी,
कह दूंगी...चाँद से भी आज कि,
मैं पिया सी हो गयी..!!!

4 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (30.10.2015) को "आलस्य और सफलता "(चर्चा अंक-2145) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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  2. सुंदर प्रस्तुति करवा चौथ की।

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  3. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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